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निर्भया याद है न?

Nirbhaya
Written by Neha Kukreti
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तू समझदार है तू ताक़तवर है दुनिया तेरी मुट्ठी में है 
फिर क्यूँ तुझे तेरी लड़ाईं में किसी की भी ज़रूरत है 
बलात्कार सिर्फ़ उस दिन नहीं हुआ ये रोज़ तेरे साथ होता है
जब जब तुझे याद करके हर एक आदमी नई कहानी बोता है
तेरे दर्दनाक हादसे में भी लोगों ने निजी फ़ायेदे उठाए हैं
धरने देकर नाम तेरे कई लोगों ने पैसेे कमाए हैं
फ़ंड भी तेरे नाम से कई लोगों को आए हैं
बेशर्म बनकर उन्होंने ख़ूब मज़े उड़ाए हैं..
बस! बहुत हो गया रोना धोना 
बेचारगी सा तेरा सहना
अब किसी से कुछ नहीं कहना 
बनकर निडर तुझको है जीना
निर्भया, ये तेरी लड़ाई है… तुझको ही लड़नी है….
निर्भया, ये तेरी लड़ाई है… ये लड़ाई तेरी है…
हर बात में तू आगे है दुनिया को तू जीती है 
फिर क्यूँ भावुक होकर तू दिन रात रोती है 
उठ संभल समझ नारी शक्ति को 
मर्यादा के अपने इस अनमोल गहने को…
पुरुष प्रधान देश में तूने अपनी जगह बनाई है 
आँखें उठेंगी तुझपर हर पल अब तेरी ख़ुद से लड़ाई है 
किसी ने तुझे कपड़ों के लिए टोका 
किसी ने तुझे ज़िंदगी जीने से रोका 
किसी ने तेरी आत्मशक्ति को ललकारा 
किसी ने तेरे मन को तोड़ा, 
किसी ने तेरी आत्मा को झकझोरा 
बस! बहुत हो गया रोना धोना 
लाचारगी सा तेरा सहना
अब किसी से कुछ नहीं कहना 
बनकर निडर तुझको है जीना
निर्भया, ये लड़ाई तेरी है… तुझको ही लड़नी है…
तू मत कर इनपर ज़रा भी ऐतबार 
कर ले ख़ुद से थोड़ा सा प्यार 
ये नज़रें ख़ुद बख़ुद झुक जायेंगी 
जिस दिन तुझे नारी शक्ति समझ आएगी 
तू माँ है, तू बेटी है, तू बहन किसी की मंगेतर है 
तू पत्नी है, जगत जननी है, तू है तो ये हैं, 
तू नहीं तो कुछ भी नहीं!
जिस दिन तू इस बात को समझ जाएगी 
दूसरी निर्भया फिर कभी इस तरह 
रोज़ ना मारी जाएगी
बस! बहुत हो गया रोना धोना 
बेचारगी सा तेरा सहना 
अब किसी से कुछ नहीं कहना 
बनकर निडर तुझको है जीना
निर्भया, ये तेरी लड़ाई है… तुझको ही लड़नी है…
नेहा कुकरेती
देश प्रेमी ✍

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